॥ श्रीहरिः ॥
पारायण · प्रयोग 30 · 8 दिन
(३०) अष्टाहपारायण (आठ दिनका)
अकाल मृत्युसे बचनेके लिये
दिन |
विश्रामस्थल-स्कन्ध |
अध्याय |
योग अध्याय |
१ |
३ |
८ |
३७ |
२ |
४ |
८ |
३३ |
३ |
५ |
२४ |
४७ |
४ |
८ |
९ |
४५ |
५ |
१० |
१० |
४९ |
६ |
१० |
५६ |
४६ |
७ |
११ |
९ |
४३ |
८ |
१२ |
१३* |
३५ |
पाठ-क्रम
- दिन 1प्रथम स्कन्ध · अध्याय 1 से तृतीय स्कन्ध · अध्याय 8 तक37 अध्याय
इस दिनके 37 अध्याय
- 1.1 श्रीसूतजीसे शौनकादि ऋषियोंका प्रश्न
- 1.2 भगवत्कथा और भगवद्भक्तिका माहात्म्य
- 1.3 भगवान्के अवतारोंका वर्णन
- 1.4 महर्षि व्यासका असन्तोष
- 1.5 भगवान्के यश-कीर्तनकी महिमा और देवर्षि नारदजीका पूर्वचरित्र
- 1.6 नारदजीके पूर्वचरित्रका शेष भाग
- 1.7 अश्वत्थामाद्वारा द्रौपदीके पुत्रोंका मारा जाना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाका मानमर्दन
- 1.8 गर्भमें परीक्षित्की रक्षा, कुन्तीके द्वारा भगवान्की स्तुति और युधिष्ठिरका शोक
- 1.9 युधिष्ठिरादिका भीष्मजीके पास जाना और भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति करते हुए भीष्मजीका प्राणत्याग करना
- 1.10 श्रीकृष्णका द्वारका-गमन
- 1.11 द्वारकामें श्रीकृष्णका राजोचित स्वागत
- 1.12 परीक्षित्का जन्म
- 1.13 विदुरजीके उपदेशसे धृतराष्ट्र और गान्धारीका वनमें जाना
- 1.14 अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिरका शंका करना और अर्जुनका द्वारकासे लौटना
- 1.15 कृष्णविरहव्यथित पाण्डवोंका परीक्षित्को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना
- 1.16 परीक्षित्की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद
- 1.17 महाराज परीक्षित्द्वारा कलियुगका दमन
- 1.18 राजा परीक्षित्को शृंगी ऋषिका शाप
- 1.19 परीक्षित्का अनशनव्रत और शुकदेवजीका आगमन
- 2.1 ध्यान-विधि और भगवान्के विराट्स्वरूपका वर्णन
- 2.2 भगवान्के स्थूल और सूक्ष्मरूपोंकी धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्तिका वर्णन
- 2.3 कामनाओंके अनुसार विभिन्न देवताओंकी उपासना तथा भगवद्भक्तिके प्राधान्यका निरूपण
- 2.4 राजाका सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजीका कथारम्भ
- 2.5 सृष्टि-वर्णन
- 2.6 विराट्स्वरूपकी विभूतियोंका वर्णन
- 2.7 भगवान्के लीलावतारोंकी कथा
- 2.8 राजा परीक्षित्के विविध प्रश्न
- 2.9 ब्रह्माजीका भगवद्धामदर्शन और भगवान्के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवतका उपदेश
- 2.10 भागवतके दस लक्षण
- 3.1 उद्धव और विदुरकी भेंट
- 3.2 उद्धवजीद्वारा भगवान्की बाललीलाओंका वर्णन
- 3.3 भगवान्के अन्य लीलाचरित्रोंका वर्णन
- 3.4 उद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना
- 3.5 विदुरजीका प्रश्न और मैत्रेयजीका सृष्टिक्रमवर्णन
- 3.6 विराट् शरीरकी उत्पत्ति
- 3.7 विदुरजीके प्रश्न
- 3.8 ब्रह्माजीकी उत्पत्ति
- दिन 2तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 से चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 तक33 अध्याय
इस दिनके 33 अध्याय
- 3.9 ब्रह्माजीद्वारा भगवान्की स्तुति
- 3.10 दस प्रकारकी सृष्टिका वर्णन
- 3.11 मन्वन्तरादि कालविभागका वर्णन
- 3.12 सृष्टिका विस्तार
- 3.13 वाराह-अवतारकी कथा
- 3.14 दितिका गर्भधारण
- 3.15 जय-विजयको सनकादिका शाप
- 3.16 जय-विजयका वैकुण्ठसे पतन
- 3.17 हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षका जन्म तथा हिरण्याक्षकी दिग्विजय
- 3.18 हिरण्याक्षके साथ वराहभगवान्का युद्ध
- 3.19 हिरण्याक्षवध
- 3.20 ब्रह्माजीकी रची हुई अनेक प्रकारकी सृष्टिका वर्णन
- 3.21 कर्दमजीकी तपस्या और भगवान्का वरदान
- 3.22 देवहूतिके साथ कर्दम प्रजापतिका विवाह
- 3.23 कर्दम और देवहूतिका विहार
- 3.24 श्रीकपिलदेवजीका जन्म
- 3.25 देवहूतिका प्रश्न तथा भगवान् कपिलद्वारा भक्तियोगकी महिमाका वर्णन
- 3.26 महदादि भिन्न-भिन्न तत्त्वोंकी उत्पत्तिका वर्णन
- 3.27 प्रकृति-पुरुषके विवेकसे मोक्ष-प्राप्तिका वर्णन
- 3.28 अष्टांगयोगकी विधि
- 3.29 भक्तिका मर्म और कालकी महिमा
- 3.30 देह-गेहमें आसक्त पुरुषोंकी अधोगतिका वर्णन
- 3.31 मनुष्ययोनिको प्राप्त हुए जीवकी गतिका वर्णन
- 3.32 धूममार्ग और अर्चिरादि मार्गसे जानेवालोंकी गतिका और भक्तियोगकी उत्कृष्टताका वर्णन
- 3.33 देवहूतिको तत्त्वज्ञान एवं मोक्षपदकी प्राप्ति
- 4.1 स्वायम्भुव-मनुकी कन्याओंके वंशका वर्णन
- 4.2 भगवान् शिव और दक्ष प्रजापतिका मनोमालिन्य
- 4.3 सतीका पिताके यहाँ यज्ञोत्सवमें जानेके लिये आग्रह करना
- 4.4 सतीका अग्निप्रवेश
- 4.5 वीरभद्रकृत दक्षयज्ञविध्वंस और दक्षवध
- 4.6 ब्रह्मादि देवताओंका कैलास जाकर श्रीमहादेवजीको मनाना
- 4.7 दक्षयज्ञकी पूर्ति
- 4.8 ध्रुवका वन-गमन
- दिन 3चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 से पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 24 तक47 अध्याय
पाठ आरम्भ: 4.9 · विश्राम: 5.24
इस दिनके 47 अध्याय
- 4.9 ध्रुवका वर पाकर घर लौटना
- 4.10 उत्तमका मारा जाना, ध्रुवका यक्षोंके साथ युद्ध
- 4.11 स्वायम्भुव-मनुका ध्रुवजीको युद्ध बंद करनेके लिये समझाना
- 4.12 ध्रुवजीको कुबेरका वरदान और विष्णुलोककी प्राप्ति
- 4.13 ध्रुववंशका वर्णन, राजा अंगका चरित्र
- 4.14 राजा वेनकी कथा
- 4.15 महाराज पृथुका आविर्भाव और राज्याभिषेक
- 4.16 वन्दीजनद्वारा महाराज पृथुकी स्तुति
- 4.17 महाराज पृथुका पृथ्वीपर कुपित होना और पृथ्वीके द्वारा उनकी स्तुति करना
- 4.18 पृथ्वी-दोहन
- 4.19 महाराज पृथुके सौ अश्वमेध यज्ञ
- 4.20 महाराज पृथुकी यज्ञशालामें श्रीविष्णुभगवान्का प्रादुर्भाव
- 4.21 महाराज पृथुका अपनी प्रजाको उपदेश
- 4.22 महाराज पृथुको सनकादिका उपदेश
- 4.23 राजा पृथुकी तपस्या और परलोकगमन
- 4.24 पृथुकी वंशपरम्परा और प्रचेताओंको भगवान् रुद्रका उपदेश
- 4.25 पुरंजनोपाख्यानका प्रारम्भ
- 4.26 राजा पुरंजनका शिकार खेलने वनमें जाना और रानीका कुपित होना
- 4.27 पुरंजनपुरीपर चण्डवेगकी चढ़ाई तथा कालकन्याका चरित्र
- 4.28 पुरंजनको स्त्रीयोनिकी प्राप्ति और अविज्ञातके उपदेशसे उसका मुक्त होना
- 4.29 पुरंजनोपाख्यानका तात्पर्य
- 4.30 प्रचेताओंको श्रीविष्णुभगवान्का वरदान
- 4.31 प्रचेताओंको श्रीनारदजीका उपदेश और उनका परमपद-लाभ
- 5.1 प्रियव्रत-चरित्र
- 5.2 आग्नीध्र-चरित्र
- 5.3 राजा नाभिका चरित्र
- 5.4 ऋषभदेवजीका राज्यशासन
- 5.5 ऋषभजीका अपने पुत्रोंको उपदेश देना और स्वयं अवधूतवृत्ति ग्रहण करना
- 5.6 ऋषभदेवजीका देहत्याग
- 5.7 भरत-चरित्र
- 5.8 भरतजीका मृगके मोहमें फँसकर मृगयोनिमें जन्म लेना
- 5.9 भरतजीका ब्राह्मणकुलमें जन्म
- 5.10 जडभरत और राजा रहूगणकी भेंट
- 5.11 राजा रहूगणको भरतजीका उपदेश
- 5.12 रहूगणका प्रश्न और भरतजीका समाधान
- 5.13 भवाटवीका वर्णन और रहूगणका संशयनाश
- 5.14 भवाटवीका स्पष्टीकरण
- 5.15 भरतके वंशका वर्णन
- 5.16 भुवनकोशका वर्णन
- 5.17 गंगाजीका विवरण और भगवान् शंकरकृत संकर्षणदेवकी स्तुति
- 5.18 भिन्न-भिन्न वर्षोंका वर्णन
- 5.19 किम्पुरुष और भारतवर्षका वर्णन
- 5.20 अन्य छः द्वीपों तथा लोकालोकपर्वतका वर्णन
- 5.21 सूर्यके रथ और उसकी गतिका वर्णन
- 5.22 भिन्न-भिन्न ग्रहोंकी स्थिति और गतिका वर्णन
- 5.23 शिशुमारचक्रका वर्णन
- 5.24 राहु आदिकी स्थिति, अतलादि नीचेके लोकोंका वर्णन
- दिन 4पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 25 से अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 तक45 अध्याय
पाठ आरम्भ: 5.25 · विश्राम: 8.9
इस दिनके 45 अध्याय
- 5.25 श्रीसङ्कर्षणदेवका विवरण और स्तुति
- 5.26 नरकोंकी विभिन्न गतियोंका वर्णन
- 6.1 अजामिलोपाख्यानका प्रारम्भ
- 6.2 विष्णुदूतोंद्वारा भागवतधर्म-निरूपण और अजामिलका परमधामगमन
- 6.3 यम और यमदूतोंका संवाद
- 6.4 दक्षके द्वारा भगवान्की स्तुति और भगवान्का प्रादुर्भाव
- 6.5 श्रीनारदजीके उपदेशसे दक्षपुत्रोंकी विरक्ति तथा नारदजीको दक्षका शाप
- 6.6 दक्षप्रजापतिकी साठ कन्याओंके वंशका विवरण
- 6.7 बृहस्पतिजीके द्वारा देवताओंका त्याग और विश्वरूपका देवगुरुके रूपमें वरण
- 6.8 नारायणकवचका उपदेश
- 6.9 विश्वरूपका वध, वृत्रासुरद्वारा देवताओंकी हार और भगवान्की प्रेरणासे देवताओंका दधीचि ऋषिके पास जाना
- 6.10 देवताओंद्वारा दधीचि ऋषिकी अस्थियोंसे वज्र-निर्माण और वृत्रासुरकी सेनापर आक्रमण
- 6.11 वृत्रासुरकी वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति
- 6.12 वृत्रासुरका वध
- 6.13 इन्द्रपर ब्रह्महत्याका आक्रमण
- 6.14 वृत्रासुरका पूर्वचरित्र
- 6.15 चित्रकेतुको अंगिरा और नारदजीका उपदेश
- 6.16 चित्रकेतुका वैराग्य तथा संकर्षणदेवके दर्शन
- 6.17 चित्रकेतुको पार्वतीजीका शाप
- 6.18 अदिति और दितिकी सन्तानोंकी तथा मरुद्गणोंकी उत्पत्तिका वर्णन
- 6.19 पुंसवन-व्रतकी विधि
- 7.1 नारद-युधिष्ठिर-संवाद और जय-विजयकी कथा
- 7.2 हिरण्याक्षका वध होनेपर हिरण्यकशिपुका अपनी माता और कुटुम्बियोंको समझाना
- 7.3 हिरण्यकशिपुकी तपस्या और वरप्राप्ति
- 7.4 हिरण्यकशिपुके अत्याचार और प्रह्लादके गुणोंका वर्णन
- 7.5 हिरण्यकशिपुके द्वारा प्रह्लादजीके वधका प्रयत्न
- 7.6 प्रह्लादजीका असुर-बालकोंको उपदेश
- 7.7 प्रह्लादजीद्वारा माताके गर्भमें प्राप्त हुए नारदजीके उपदेशका वर्णन
- 7.8 नृसिंहभगवान्का प्रादुर्भाव, हिरण्यकशिपुका वध एवं ब्रह्मादि देवताओंद्वारा भगवान्की स्तुति
- 7.9 प्रह्लादजीके द्वारा नृसिंहभगवान्की स्तुति
- 7.10 प्रह्लादजीके राज्याभिषेक और त्रिपुरदहनकी कथा
- 7.11 मानवधर्म, वर्णधर्म और स्त्रीधर्मका निरूपण
- 7.12 ब्रह्मचर्य और वानप्रस्थ आश्रमोंके नियम
- 7.13 यतिधर्मका निरूपण और अवधूत-प्रह्लाद-संवाद
- 7.14 गृहस्थसम्बन्धी सदाचार
- 7.15 गृहस्थोंके लिये मोक्षधर्मका वर्णन
- 8.1 मन्वन्तरोंका वर्णन
- 8.2 ग्राहके द्वारा गजेन्द्रका पकड़ा जाना
- 8.3 गजेन्द्रके द्वारा भगवान्की स्तुति और उसका संकटसे मुक्त होना
- 8.4 गज और ग्राहका पूर्वचरित्र तथा उनका उद्धार
- 8.5 देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाना और ब्रह्माकृत भगवान्की स्तुति
- 8.6 देवताओं और दैत्योंका मिलकर समुद्रमन्थनके लिये उद्योग करना
- 8.7 समुद्रमन्थनका आरम्भ और भगवान् शंकरका विषपान
- 8.8 समुद्रसे अमृतका प्रकट होना और भगवान्का मोहिनी-अवतार ग्रहण करना
- 8.9 मोहिनीरूपसे भगवान्के द्वारा अमृत बाँटा जाना
- दिन 5अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 से दशम स्कन्ध · अध्याय 10 तक49 अध्याय
पाठ आरम्भ: 8.10 · विश्राम: 10.10
इस दिनके 49 अध्याय
- 8.10 देवासुर-संग्राम
- 8.11 देवासुर-संग्रामकी समाप्ति
- 8.12 मोहिनीरूपको देखकर महादेवजीका मोहित होना
- 8.13 आगामी सात मन्वन्तरोंका वर्णन
- 8.14 मनु आदिके पृथक्-पृथक् कर्मोंका निरूपण
- 8.15 राजा बलिकी स्वर्गपर विजय
- 8.16 कश्यपजीके द्वारा अदितिको पयोव्रतका उपदेश
- 8.17 भगवान्का प्रकट होकर अदितिको वर देना
- 8.18 वामनभगवान्का प्रकट होकर राजा बलिकी यज्ञशालामें पधारना
- 8.19 भगवान् वामनका बलिसे तीन पग पृथ्वी माँगना, बलिका वचन देना और शुक्राचार्यजीका उन्हें रोकना
- 8.20 भगवान् वामनजीका विराट्रूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना
- 8.21 बलिका बाँधा जाना
- 8.22 बलिके द्वारा भगवान्की स्तुति और भगवान्का उसपर प्रसन्न होना
- 8.23 बलिका बन्धनसे छूटकर सुतललोकको जाना
- 8.24 भगवान्के मत्स्यावतारकी कथा
- 9.1 वैवस्वत मनुके पुत्र राजा सुद्युम्नकी कथा
- 9.2 पृषध्र आदि मनुके पाँच पुत्रोंका वंश
- 9.3 महर्षि च्यवन और सुकन्याका चरित्र, राजा शर्यातिका वंश
- 9.4 नाभाग और अम्बरीषकी कथा
- 9.5 दुर्वासाजीकी दुःखनिवृत्ति
- 9.6 इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन, मान्धाता और सौभरि ऋषिकी कथा
- 9.7 राजा त्रिशङ्कु और हरिश्चन्द्रकी कथा
- 9.8 सगर-चरित्र
- 9.9 भगीरथ-चरित्र और गंगावतरण
- 9.10 भगवान् श्रीरामकी लीलाओंका वर्णन
- 9.11 भगवान् श्रीरामकी शेष लीलाओंका वर्णन
- 9.12 इक्ष्वाकुवंशके शेष राजाओंका वर्णन
- 9.13 राजा निमिके वंशका वर्णन
- 9.14 चन्द्रवंशका वर्णन
- 9.15 ऋचीक, जमदग्नि और परशुरामजीका चरित्र
- 9.16 परशुरामजीके द्वारा क्षत्रियसंहार और विश्वामित्रजीके वंशकी कथा
- 9.17 क्षत्रवृद्ध, रजि आदि राजाओंके वंशका वर्णन
- 9.18 ययाति-चरित्र
- 9.19 ययातिका गृहत्याग
- 9.20 पूरुके वंश, राजा दुष्यन्त और भरतके चरित्रका वर्णन
- 9.21 भरतवंशका वर्णन, राजा रन्तिदेवकी कथा
- 9.22 पांचाल, कौरव और मगधदेशीय राजाओंके वंशका वर्णन
- 9.23 अनु, द्रुह्यु, तुर्वसु और यदुके वंशका वर्णन
- 9.24 विदर्भके वंशका वर्णन
- 10.1 भगवान्के द्वारा पृथ्वीको आश्वासन, वसुदेव-देवकीका विवाह और कंसके द्वारा देवकीके छः पुत्रोंकी हत्या
- 10.2 भगवान्का गर्भ-प्रवेश और देवताओंद्वारा गर्भ-स्तुति
- 10.3 भगवान् श्रीकृष्णका प्राकट्य
- 10.4 कंसके हाथसे छूटकर योगमायाका आकाशमें जाकर भविष्यवाणी करना
- 10.5 गोकुलमें भगवान्का जन्ममहोत्सव
- 10.6 पूतना-उद्धार
- 10.7 शकट-भंजन और तृणावर्त-उद्धार
- 10.8 नामकरण-संस्कार और बाललीला
- 10.9 श्रीकृष्णका ऊखलसे बाँधा जाना
- 10.10 यमलार्जुनका उद्धार
- दिन 6दशम स्कन्ध · अध्याय 11 से दशम स्कन्ध · अध्याय 56 तक46 अध्याय
पाठ आरम्भ: 10.11 · विश्राम: 10.56
इस दिनके 46 अध्याय
- 10.11 गोकुलसे वृन्दावन जाना तथा वत्सासुर और बकासुरका उद्धार
- 10.12 अघासुरका उद्धार
- 10.13 ब्रह्माजीका मोह और उसका नाश
- 10.14 ब्रह्माजीके द्वारा भगवान्की स्तुति
- 10.15 धेनुकासुरका उद्धार और ग्वालबालोंको कालियनागके विषसे बचाना
- 10.16 कालियपर कृपा
- 10.17 कालियके कालियदहमें आनेकी कथा तथा भगवान्का व्रजवासियोंको दावानलसे बचाना
- 10.18 प्रलम्बासुर-उद्धार
- 10.19 गौओं और गोपोंको दावानलसे बचाना
- 10.20 वर्षा और शरद्ऋतुका वर्णन
- 10.21 वेणुगीत
- 10.22 चीरहरण
- 10.23 यज्ञपत्नियोंपर कृपा
- 10.24 इन्द्रयज्ञ-निवारण
- 10.25 गोवर्धनधारण
- 10.26 नन्दबाबासे गोपोंकी श्रीकृष्णके प्रभावके विषयमें बातचीत
- 10.27 श्रीकृष्णका अभिषेक
- 10.28 वरुणलोकसे नन्दजीको छुड़ाकर लाना
- 10.29 रासलीलाका आरम्भ
- 10.30 श्रीकृष्णके विरहमें गोपियोंकी दशा
- 10.31 गोपिकागीत
- 10.32 भगवान्का प्रकट होकर गोपियोंको सान्त्वना देना
- 10.33 महारास
- 10.34 सुदर्शन और शंखचूडका उद्धार
- 10.35 युगलगीत
- 10.36 अरिष्टासुरका उद्धार और कंसका श्रीअक्रूरजीको व्रजमें भेजना
- 10.37 केशी और व्योमासुरका उद्धार तथा नारदजीके द्वारा भगवान्की स्तुति
- 10.38 अक्रूरजीकी व्रजयात्रा
- 10.39 श्रीकृष्ण-बलरामका मथुरागमन
- 10.40 अक्रूरजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति
- 10.41 श्रीकृष्णका मथुराजीमें प्रवेश
- 10.42 कुब्जापर कृपा, धनुषभंग और कंसकी घबड़ाहट
- 10.43 कुवलयापीडका उद्धार और अखाड़ेमें प्रवेश
- 10.44 चाणूर, मुष्टिक आदि पहलवानोंका तथा कंसका उद्धार
- 10.45 श्रीकृष्ण-बलरामका यज्ञोपवीत और गुरुकुलप्रवेश
- 10.46 उद्धवजीकी व्रजयात्रा
- 10.47 उद्धव तथा गोपियोंकी बातचीत और भ्रमरगीत
- 10.48 भगवान्का कुब्जा और अक्रूरजीके घर जाना
- 10.49 अक्रूरजीका हस्तिनापुर जाना
- 10.50 जरासन्धसे युद्ध और द्वारकापुरीका निर्माण
- 10.51 कालयवनका भस्म होना, मुचुकुन्दकी कथा
- 10.52 द्वारकागमन, श्रीबलरामजीका विवाह तथा श्रीकृष्णके पास रुक्मिणीजीका सन्देशा लेकर ब्राह्मणका आना
- 10.53 रुक्मिणीहरण
- 10.54 शिशुपालके साथी राजाओंकी और रुक्मीकी हार तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-विवाह
- 10.55 प्रद्युम्नका जन्म और शम्बरासुरका वध
- 10.56 स्यमन्तकमणिकी कथा, जाम्बवती और सत्यभामाके साथ श्रीकृष्णका विवाह
- दिन 7दशम स्कन्ध · अध्याय 57 से एकादश स्कन्ध · अध्याय 9 तक43 अध्याय
पाठ आरम्भ: 10.57 · विश्राम: 11.9
इस दिनके 43 अध्याय
- 10.57 स्यमन्तक-हरण, शतधन्वाका उद्धार और अक्रूरजीको फिरसे द्वारका बुलाना
- 10.58 भगवान् श्रीकृष्णके अन्यान्य विवाहोंकी कथा
- 10.59 भौमासुरका उद्धार और सोलह हजार एक सौ राज- कन्याओंके साथ भगवान्का विवाह
- 10.60 श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-संवाद
- 10.61 भगवान्की सन्ततिका वर्णन तथा अनिरुद्धके विवाहमें रुक्मीका मारा जाना
- 10.62 ऊषा-अनिरुद्ध-मिलन
- 10.63 भगवान् श्रीकृष्णके साथ बाणासुरका युद्ध
- 10.64 नृग राजाकी कथा
- 10.65 श्रीबलरामजीका व्रजगमन
- 10.66 पौण्ड्रक और काशिराजका उद्धार
- 10.67 द्विविदका उद्धार
- 10.68 कौरवोंपर बलरामजीका कोप और साम्बका विवाह
- 10.69 देवर्षि नारदजीका भगवान्की गृहचर्या देखना
- 10.70 भगवान् श्रीकृष्णकी नित्यचर्या और उनके पास जरासन्धके कैदी राजाओंके दूतका आना
- 10.71 श्रीकृष्णभगवान्का इन्द्रप्रस्थ पधारना
- 10.72 पाण्डवोंके राजसूययज्ञका आयोजन और जरासन्धका उद्धार
- 10.73 जरासन्धके जेलसे छूटे हुए राजाओंकी बिदाई और भगवान्का इन्द्रप्रस्थ लौट आना
- 10.74 भगवान्की अग्रपूजा और शिशुपालका उद्धार
- 10.75 राजसूय यज्ञकी पूर्ति और दुर्योधनका अपमान
- 10.76 शाल्वके साथ यादवोंका युद्ध
- 10.77 शाल्व-उद्धार
- 10.78 दन्तवक्त्र और विदूरथका उद्धार तथा तीर्थयात्रामें बलरामजीके हाथसे सूतजीका वध
- 10.79 बल्वलका उद्धार और बलरामजीकी तीर्थयात्रा
- 10.80 श्रीकृष्णके द्वारा सुदामाजीका स्वागत
- 10.81 सुदामाजीको ऐश्वर्यकी प्राप्ति
- 10.82 भगवान् श्रीकृष्ण-बलरामसे गोप-गोपियोंकी भेंट
- 10.83 भगवान्की पटरानियोंके साथ द्रौपदीकी बातचीत
- 10.84 वसुदेवजीका यज्ञोत्सव
- 10.85 श्रीभगवान्के द्वारा वसुदेवजीको ब्रह्मज्ञानका उपदेश तथा देवकीजीके छः पुत्रोंको लौटा लाना
- 10.86 सुभद्राहरण और भगवान्का मिथिलापुरीमें राजा जनक और श्रुतदेव ब्राह्मणके घर एक ही साथ जाना
- 10.87 वेदस्तुति
- 10.88 शिवजीका संकटमोचन
- 10.89 भृगुजीके द्वारा त्रिदेवोंकी परीक्षा तथा भगवान्का मरे हुए ब्राह्मण-बालकोंको वापस लाना
- 10.90 भगवान् श्रीकृष्णके लीला-विहारका वर्णन
- 11.1 यदुवंशको ऋषियोंका शाप
- 11.2 वसुदेवजीके पास श्रीनारदजीका आना और उन्हें राजा जनक तथा नौ योगीश्वरोंका संवाद सुनाना
- 11.3 माया, मायासे पार होनेके उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोगका निरूपण
- 11.4 भगवान्के अवतारोंका वर्णन
- 11.5 भक्तिहीन पुरुषोंकी गति और भगवान्की पूजाविधिका वर्णन
- 11.6 देवताओंकी भगवान्से स्वधाम सिधारनेके लिये प्रार्थना तथा यादवोंको प्रभासक्षेत्र जानेकी तैयारी करते देखकर उद्धवका भगवान्के पास आना
- 11.7 अवधूतोपाख्यान—पृथ्वीसे लेकर कबूतरतक आठ गुरुओंकी कथा
- 11.8 अवधूतोपाख्यान—अजगरसे लेकर पिंगलातक नौ गुरुओंकी कथा
- 11.9 अवधूतोपाख्यान—कुररसे लेकर भृंगीतक सात गुरुओंकी कथा
- दिन 8एकादश स्कन्ध · अध्याय 10 से द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 तक35 अध्याय
पाठ आरम्भ: 11.10 · विश्राम: 12.13
इस दिनके 35 अध्याय
- 11.10 लौकिक तथा पारलौकिक भोगोंकी असारताका निरूपण
- 11.11 बद्ध, मुक्त और भक्तजनोंके लक्षण
- 11.12 सत्संगकी महिमा और कर्म तथा कर्मत्यागकी विधि
- 11.13 हंसरूपसे सनकादिको दिये हुए उपदेशका वर्णन
- 11.14 भक्तियोगकी महिमा तथा ध्यानविधिका वर्णन
- 11.15 भिन्न-भिन्न सिद्धियोंके नाम और लक्षण
- 11.16 भगवान्की विभूतियोंका वर्णन
- 11.17 वर्णाश्रम-धर्म-निरूपण
- 11.18 वानप्रस्थ और संन्यासीके धर्म
- 11.19 भक्ति, ज्ञान और यम-नियमादि साधनोंका वर्णन
- 11.20 ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग
- 11.21 गुण-दोष-व्यवस्थाका स्वरूप और रहस्य
- 11.22 तत्त्वोंकी संख्या और पुरुष-प्रकृति-विवेक
- 11.23 एक तितिक्षु ब्राह्मणका इतिहास
- 11.24 सांख्ययोग
- 11.25 तीनों गुणोंकी वृत्तियोंका निरूपण
- 11.26 पुरूरवाकी वैराग्योक्ति
- 11.27 क्रियायोगका वर्णन
- 11.28 परमार्थनिरूपण
- 11.29 भागवतधर्मोंका निरूपण और उद्धवजीका बदरिकाश्रमगमन
- 11.30 यदुकुलका संहार
- 11.31 श्रीभगवान्का स्वधामगमन
- 12.1 कलियुगके राजवंशोंका वर्णन
- 12.2 कलियुगके धर्म
- 12.3 राज्य, युगधर्म और कलियुगके दोषोंसे बचनेका उपाय—नामसंकीर्तन
- 12.4 चार प्रकारके प्रलय
- 12.5 श्रीशुकदेवजीका अन्तिम उपदेश
- 12.6 परीक्षित्की परमगति, जनमेजयका सर्पसत्र और वेदोंके शाखाभेद
- 12.7 अथर्ववेदकी शाखाएँ और पुराणोंके लक्षण
- 12.8 मार्कण्डेयजीकी तपस्या और वर-प्राप्ति
- 12.9 मार्कण्डेयजीका माया-दर्शन
- 12.10 मार्कण्डेयजीको भगवान् शंकरका वरदान
- 12.11 भगवान्के अंग, उपांग और आयुधोंका रहस्य तथा विभिन्न सूर्यगणोंका वर्णन
- 12.12 श्रीमद्भागवतकी संक्षिप्त विषय-सूची
- 12.13 विभिन्न पुराणोंकी श्लोक-संख्या और श्रीमद्भागवतकी महिमा