युधिष्ठिर! त्रेता आदि युगोंमें जब विद्वानोंने देखा कि मनुष्य परस्पर एक-दूसरेका अपमान आदि करते हैं, तब उन लोगोंने उपासनाकी सिद्धिके लिये भगवान्की प्रतिमाकी प्रतिष्ठा की॥ ३९॥✎ 643644
दृष्ट्वा तेषां मिथो नॄणामवज्ञानात्मतां नृप।
त्रेतादिषु हरेरर्चा क्रियायै कविभिः कृता॥ ३९
युधिष्ठिर! त्रेता आदि युगोंमें जब विद्वानोंने देखा कि मनुष्य परस्पर एक-दूसरेका अपमान आदि करते हैं, तब उन लोगोंने उपासनाकी सिद्धिके लिये भगवान्की प्रतिमाकी प्रतिष्ठा की॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.14.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 893) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/14/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)