चर प्राणियोंकी अचर-पदार्थ ‘वृत्ति’ अर्थात् जीवन-निर्वाहकी सामग्री है। चर प्राणियोंके दुग्ध आदि भी इनमेंसे मनुष्योंने कुछ तो स्वभाववश कामनाके अनुसार निश्चित कर ली है और कुछने शास्त्रके आज्ञानुसार॥ १३॥
वृत्तिर्भूतानि भूतानां चराणामचराणि च।
कृता स्वेन नृणां तत्र कामाच्चोदनयापि वा॥ १३
चर प्राणियोंकी अचर-पदार्थ ‘वृत्ति’ अर्थात् जीवन-निर्वाहकी सामग्री है। चर प्राणियोंके दुग्ध आदि भी इनमेंसे मनुष्योंने कुछ तो स्वभाववश कामनाके अनुसार निश्चित कर ली है और कुछने शास्त्रके आज्ञानुसार॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.7.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 944) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/7/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1241 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नॄणां → नृणां