श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.7.14

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

रक्षाच्युतावतारेहा विश्‍वस्यानु युगे युगे।

तिर्यङ्मर्त्यर्षिदेवेषु हन्यन्ते यैस्त्रयीद्विषः॥ १४

rakṣācyutāvatārehā viśvasyānu yuge yuge|

tiryaṅmartyarṣideveṣu hanyante yaistrayīdviṣaḥ|| 14

अर्थ

भगवान् युग-युगमें पशु-पक्षी, मनुष्य, ऋषि, देवता आदिके रूपमें अवतार ग्रहण करके अनेकों लीलाएँ करते हैं। इन्हीं अवतारोंमें वे वेदधर्मके विरोधियोंका संहार भी करते हैं। उनकी यह अवतार-लीला विश्‍वकी रक्षाके लिये ही होती है, इसीलिये उसका नाम ‘रक्षा’ है॥ १४॥

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