श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.7.12

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

पुरुषानुगृहीतानामेतेषां वासनामयः।

विसर्गोऽयं समाहारो बीजाद् बीजं चराचरम्॥ १२

puruṣānugṛhītānāmeteṣāṃ vāsanāmayaḥ|

visargo'yaṃ samāhāro bījād bījaṃ carācaram|| 12

अर्थ

परमेश्‍वरके अनुग्रहसे सृष्टिका सामर्थ्य प्राप्त करके महत्तत्त्व आदि पूर्वकर्मोंके अनुसार अच्छी और बुरी वासनाओंकी प्रधानतासे जो यह चराचर शरीरात्मक जीवकी उपाधिकी सृष्टि करते हैं, एक बीजसे दूसरे बीजके समान, इसीको विसर्ग कहते हैं॥ १२॥

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