॥ श्रीहरिः ॥
दशम स्कन्ध (उत्तरार्ध)
श्रीमद्भागवतमहापुराणम्
दशमः स्कन्धः
(उत्तरार्धः)
- 50अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायःजरासन्धसे युद्ध और द्वारकापुरीका निर्माण58 श्लोक
पृष्ठ 444 - 51अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायःकालयवनका भस्म होना, मुचुकुन्दकी कथा64 श्लोक
पृष्ठ 452 - 52अथ द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायःद्वारकागमन, श्रीबलरामजीका विवाह तथा श्रीकृष्णके पास रुक्मिणीजीका सन्देशा लेकर ब्राह्मणका आना44 श्लोक
पृष्ठ 460 - 53अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायःरुक्मिणीहरण57 श्लोक
पृष्ठ 467 - 54अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायःशिशुपालके साथी राजाओंकी और रुक्मीकी हार तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-विवाह60 श्लोक
पृष्ठ 474 - 55अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायःप्रद्युम्नका जन्म और शम्बरासुरका वध40 श्लोक
पृष्ठ 481 - 56अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायःस्यमन्तकमणिकी कथा, जाम्बवती और सत्यभामाके साथ श्रीकृष्णका विवाह45 श्लोक
पृष्ठ 486 - 57अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायःस्यमन्तक-हरण, शतधन्वाका उद्धार और अक्रूरजीको फिरसे द्वारका बुलाना42 श्लोक
पृष्ठ 491 - 58अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायःभगवान् श्रीकृष्णके अन्यान्य विवाहोंकी कथा58 श्लोक
पृष्ठ 496 - 59अथैकोनषष्टितमोऽध्यायःभौमासुरका उद्धार और सोलह हजार एक सौ राज- कन्याओंके साथ भगवान्का विवाह45 श्लोक
पृष्ठ 503 - 60अथ षष्टितमोऽध्यायःश्रीकृष्ण-रुक्मिणी-संवाद59 श्लोक
पृष्ठ 510 - 61अथैकषष्टितमोऽध्यायःभगवान्की सन्ततिका वर्णन तथा अनिरुद्धके विवाहमें रुक्मीका मारा जाना40 श्लोक
पृष्ठ 520 - 62अथ द्विषष्टितमोऽध्यायःऊषा-अनिरुद्ध-मिलन35 श्लोक
पृष्ठ 525 - 63अथ त्रिषष्टितमोऽध्यायःभगवान् श्रीकृष्णके साथ बाणासुरका युद्ध53 श्लोक
पृष्ठ 530 - 64अथ चतुःषष्टितमोऽध्यायःनृग राजाकी कथा44 श्लोक
पृष्ठ 536 - 65अथ पञ्चषष्टितमोऽध्यायःश्रीबलरामजीका व्रजगमन32 श्लोक
पृष्ठ 542 - 66अथ षट्षष्टितमोऽध्यायःपौण्ड्रक और काशिराजका उद्धार43 श्लोक
पृष्ठ 546 - 67अथ सप्तषष्टितमोऽध्यायःद्विविदका उद्धार28 श्लोक
पृष्ठ 550 - 68अथाष्टषष्टितमोऽध्यायःकौरवोंपर बलरामजीका कोप और साम्बका विवाह54 श्लोक
पृष्ठ 554 - 69अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायःदेवर्षि नारदजीका भगवान्की गृहचर्या देखना45 श्लोक
पृष्ठ 560 - 70अथ सप्ततितमोऽध्यायःभगवान् श्रीकृष्णकी नित्यचर्या और उनके पास जरासन्धके कैदी राजाओंके दूतका आना47 श्लोक
पृष्ठ 566 - 71अथैकसप्ततितमोऽध्यायःश्रीकृष्णभगवान्का इन्द्रप्रस्थ पधारना46 श्लोक
पृष्ठ 573 - 72अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायःपाण्डवोंके राजसूययज्ञका आयोजन और जरासन्धका उद्धार48 श्लोक
पृष्ठ 580 - 73अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायःजरासन्धके जेलसे छूटे हुए राजाओंकी बिदाई और भगवान्का इन्द्रप्रस्थ लौट आना35 श्लोक
पृष्ठ 586 - 74अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायःभगवान्की अग्रपूजा और शिशुपालका उद्धार54 श्लोक
पृष्ठ 591 - 75अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्यायःराजसूय यज्ञकी पूर्ति और दुर्योधनका अपमान40 श्लोक
पृष्ठ 597 - 76अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायःशाल्वके साथ यादवोंका युद्ध33 श्लोक
पृष्ठ 602 - 77अथ सप्तसप्ततितमोऽध्यायःशाल्व-उद्धार37 श्लोक
पृष्ठ 606 - 78अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायःदन्तवक्त्र और विदूरथका उद्धार तथा तीर्थयात्रामें बलरामजीके हाथसे सूतजीका वध40 श्लोक
पृष्ठ 610 - 79अथैकोनाशीतितमोऽध्यायःबल्वलका उद्धार और बलरामजीकी तीर्थयात्रा34 श्लोक
पृष्ठ 615 - 80अथाशीतितमोऽध्यायःश्रीकृष्णके द्वारा सुदामाजीका स्वागत45 श्लोक
पृष्ठ 619 - 81अथैकाशीतितमोऽध्यायःसुदामाजीको ऐश्वर्यकी प्राप्ति41 श्लोक
पृष्ठ 624 - 82अथ द्व्यशीतितमोऽध्यायःभगवान् श्रीकृष्ण-बलरामसे गोप-गोपियोंकी भेंट49 श्लोक
पृष्ठ 629 - 83अथ त्र्यशीतितमोऽध्यायःभगवान्की पटरानियोंके साथ द्रौपदीकी बातचीत43 श्लोक
पृष्ठ 635 - 84अथ चतुरशीतितमोऽध्यायःवसुदेवजीका यज्ञोत्सव71 श्लोक
पृष्ठ 643 - 85अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायःश्रीभगवान्के द्वारा वसुदेवजीको ब्रह्मज्ञानका उपदेश तथा देवकीजीके छः पुत्रोंको लौटा लाना59 श्लोक
पृष्ठ 652 - 86अथ षडशीतितमोऽध्यायःसुभद्राहरण और भगवान्का मिथिलापुरीमें राजा जनक और श्रुतदेव ब्राह्मणके घर एक ही साथ जाना59 श्लोक
पृष्ठ 660 - 87अथ सप्ताशीतितमोऽध्यायःवेदस्तुति50 श्लोक
पृष्ठ 666 - 88अथाष्टाशीतितमोऽध्यायःशिवजीका संकटमोचन40 श्लोक
पृष्ठ 688 - 89अथैकोननवतितमोऽध्यायःभृगुजीके द्वारा त्रिदेवोंकी परीक्षा तथा भगवान्का मरे हुए ब्राह्मण-बालकोंको वापस लाना66 श्लोक
पृष्ठ 692 - 90अथ नवतितमोऽध्यायःभगवान् श्रीकृष्णके लीला-विहारका वर्णन50 श्लोक
पृष्ठ 701
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥