श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

दृष्ट्वा तदुदरे बालं मायावत्यै न्यवेदयन्।

नारदोऽकथयत् सर्वं तस्याः शंकितचेतसः।

बालस्य तत्त्वमुत्पत्तिं मत्स्योदरनिवेशनम्॥ ६

dṛṣṭvā tadudare bālaṃ māyāvatyai nyavedayan|

nārado'kathayat sarvaṃ tasyāḥ śaṃkitacetasaḥ|

bālasya tattvamutpattiṃ matsyodaraniveśanam|| 6

अर्थ

रसोइयोंने मत्स्यके पेटमें बालक देखकर उसे शम्बरासुरकी दासी मायावतीको समर्पित किया। उसके मनमें बड़ी शंका हुई। तब नारदजीने आकर बालकका कामदेव होना, श्रीकृष्णकी पत्‍नी रुक्मिणीके गर्भसे जन्म लेना, मच्छके पेटमें जाना सब कुछ कह सुनाया॥ ६॥✎ 2112

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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