रसोइयोंने मत्स्यके पेटमें बालक देखकर उसे शम्बरासुरकी दासी मायावतीको समर्पित किया। उसके मनमें बड़ी शंका हुई। तब नारदजीने आकर बालकका कामदेव होना, श्रीकृष्णकी पत्नी रुक्मिणीके गर्भसे जन्म लेना, मच्छके पेटमें जाना सब कुछ कह सुनाया॥ ६॥✎ 2112
दृष्ट्वा तदुदरे बालं मायावत्यै न्यवेदयन्।
नारदोऽकथयत् सर्वं तस्याः शंकितचेतसः।
बालस्य तत्त्वमुत्पत्तिं मत्स्योदरनिवेशनम्॥ ६
रसोइयोंने मत्स्यके पेटमें बालक देखकर उसे शम्बरासुरकी दासी मायावतीको समर्पित किया। उसके मनमें बड़ी शंका हुई। तब नारदजीने आकर बालकका कामदेव होना, श्रीकृष्णकी पत्नी रुक्मिणीके गर्भसे जन्म लेना, मच्छके पेटमें जाना सब कुछ कह सुनाया॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 481) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)