श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सा च कामस्य वै पत्‍नी रतिर्नाम यशस्विनी।

पत्युर्निर्दग्धदेहस्य देहोत्पत्तिं प्रतीक्षती॥ ७

sā ca kāmasya vai patnī ratirnāma yaśasvinī|

patyurnirdagdhadehasya dehotpattiṃ pratīkṣatī|| 7

अर्थ

परीक्षित्! वह मायावती कामदेवकी यशस्विनी पत्‍नी रति ही थी। जिस दिन शंकरजीके क्रोधसे कामदेवका शरीर भस्म हो गया था, उसी दिनसे वह उसकी देहके पुनः उत्पन्‍न होनेकी प्रतीक्षा कर रही थी॥ ७॥✎ 2112

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2112 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें