और उन्होंने उसे ले जाकर शम्बरासुरको भेंटके रूपमें दे दिया। शम्बरासुरके रसोइये उस अद्भुत मच्छको उठाकर रसोईघरमें ले आये और कुल्हाड़ियोंसे उसे काटने लगे॥ ५॥✎ 2112
तं शम्बराय कैवर्ता उपाजह्रुरुपायनम्।
सूदा महानसं नीत्वावद्यन् स्वधितिनाद्भुतम्॥ ५
और उन्होंने उसे ले जाकर शम्बरासुरको भेंटके रूपमें दे दिया। शम्बरासुरके रसोइये उस अद्भुत मच्छको उठाकर रसोईघरमें ले आये और कुल्हाड़ियोंसे उसे काटने लगे॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 481) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1176 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): उपाजहृरुपायनम्। → उपाजह्रुरुपायनम्।