रतिने कहा—‘प्रभो! आप स्वयं भगवान् नारायणके पुत्र हैं। शम्बरासुर आपको सूतिकागृहसे चुरा लाया था। आप मेरे पति स्वयं कामदेव हैं और मैं आपकी सदाकी धर्म-पत्नी रति हूँ॥ १२॥
भवान् नारायणसुतः शम्बरेणाहृतो गृहात्।
अहं तेऽधिकृता पत्नी रतिः कामो भवान् प्रभो॥ १२
रतिने कहा—‘प्रभो! आप स्वयं भगवान् नारायणके पुत्र हैं। शम्बरासुर आपको सूतिकागृहसे चुरा लाया था। आप मेरे पति स्वयं कामदेव हैं और मैं आपकी सदाकी धर्म-पत्नी रति हूँ॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 482) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/12/