श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तामाह भगवान् कार्ष्णिर्मातस्ते मतिरन्यथा।

मातृभावमतिक्रम्य वर्तसे कामिनी यथा॥ ११

tāmāha bhagavān kārṣṇirmātaste matiranyathā|

mātṛbhāvamatikramya vartase kāminī yathā|| 11

अर्थ

श्रीकृष्णनन्दन भगवान् प्रद्युम्‍नने उसके भावोंमें परिवर्तन देखकर कहा—‘देवि! तुम तो मेरी माँके समान हो। तुम्हारी बुद्धि उलटी कैसे हो गयी? मैं देखता हूँ कि तुम माताका भाव छोड़कर कामिनीके समान हाव-भाव दिखा रही हो’॥ ११॥

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