sarvaṃ no brūhyaguhyaṃ cet kiṃ kāryaṃ karavāma te|| 35
अर्थ
ब्राह्मणदेवता! आप कहाँसे, किस हेतुसे और किस अभिलाषासे इतना कठिन मार्ग तय करके यहाँ पधारे हैं? यदि कोई बात विशेष गोपनीय न हो तो हमसे कहिये। हम आपकी क्या सेवा करें?’॥ ३५॥✎ 890
यतस्त्वमागतो दुर्गं निस्तीर्येह यदिच्छया।
सर्वं नो ब्रूह्यगुह्यं चेत् किं कार्यं करवाम ते॥ ३५
ब्राह्मणदेवता! आप कहाँसे, किस हेतुसे और किस अभिलाषासे इतना कठिन मार्ग तय करके यहाँ पधारे हैं? यदि कोई बात विशेष गोपनीय न हो तो हमसे कहिये। हम आपकी क्या सेवा करें?’॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 465) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)