परीक्षित्! लीलासे ही मनुष्यरूप धारण करनेवाले भगवान् श्रीकृष्णने जब इस प्रकार ब्राह्मणदेवतासे पूछा, तब उन्होंने सारी बात कह सुनायी। इसके बाद वे भगवान्से रुक्मिणीजीका सन्देश कहने लगे॥ ३६॥✎ 890
एवं सम्पृष्टसम्प्रश्नो ब्राह्मणः परमेष्ठिना।
लीलागृहीतदेहेन तस्मै सर्वमवर्णयत्॥ ३६
परीक्षित्! लीलासे ही मनुष्यरूप धारण करनेवाले भगवान् श्रीकृष्णने जब इस प्रकार ब्राह्मणदेवतासे पूछा, तब उन्होंने सारी बात कह सुनायी। इसके बाद वे भगवान्से रुक्मिणीजीका सन्देश कहने लगे॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 465) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)