श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.47

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यद्गार्हस्थ्यं तु संवीक्ष्य सप्तद्वीपवतीपतिः।

विस्मितः स्तम्भमजहात् सार्वभौमश्रियान्वितम्॥ ४७

yadgārhasthyaṃ tu saṃvīkṣya saptadvīpavatīpatiḥ|

vismitaḥ stambhamajahāt sārvabhaumaśriyānvitam|| 47

अर्थ

सप्तद्वीपवती पृथ्वीके स्वामी मान्धाता सौभरिजीकी इस गृहस्थीका सुख देखकर आश्‍चर्यचकित हो गये। उनका यह गर्व कि मैं सार्वभौम सम्पत्तिका स्वामी हूँ, जाता रहा॥ ४७॥

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