श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.48

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

एवं गृहेष्वभिरतो विषयान् विविधैः सुखैः।

सेवमानो न चातुष्यदाज्यस्तोकैरिवानलः॥ ४८

evaṃ gṛheṣvabhirato viṣayān vividhaiḥ sukhaiḥ|

sevamāno na cātuṣyadājyastokairivānalaḥ|| 48

अर्थ

इस प्रकार सौभरिजी गृहस्थीके सुखमें रम गये और अपनी नीरोग इन्द्रियोंसे अनेकों विषयोंका सेवन करते रहे। फिर भी जैसे घीकी बूँदोंसे आग तृप्त नहीं होती, वैसे ही उन्हें सन्तोष नहीं हुआ॥ ४८॥

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