श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.32

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

न ममार पिता तस्य विप्रदेवप्रसादतः।

युवनाश्‍वोऽथ तत्रैव तपसा सिद्धिमन्वगात्॥ ३२

na mamāra pitā tasya vipradevaprasādataḥ|

yuvanāśvo'tha tatraiva tapasā siddhimanvagāt|| 32

अर्थ

ब्राह्मण और देवताओंके प्रसादसे उस बालकके पिता युवनाश्‍वकी भी मृत्यु नहीं हुई। वह वहीं तपस्या करके मुक्त हो गया॥ ३२॥✎ 1636

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

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