श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.31

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

कं धास्यति कुमारोऽयं स्तन्यं रोरूयते भृशम्।

मां धाता वत्स मा रोदीरितीन्द्रो देशिनीमदात्॥ ३१

kaṃ dhāsyati kumāro'yaṃ stanyaṃ rorūyate bhṛśam|

māṃ dhātā vatsa mā rodīritīndro deśinīmadāt|| 31

अर्थ

उसे रोते देख ऋषियोंने कहा—‘यह बालक दूधके लिये बहुत रो रहा है; अतः किसका दूध पियेगा?’ तब इन्द्रने कहा, ‘मेरा पियेगा’ ‘(मां धाता)’ ‘बेटा! तू रो मत।’ यह कहकर इन्द्रने अपनी तर्जनी अँगुली उसके मुँहमें डाल दी॥ ३१॥✎ 1636

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

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