रथीतर सन्तानहीन था। वंश परम्पराकी रक्षाके लिये उसने अंगिरा ऋषिसे प्रार्थना की, उन्होंने उसकी पत्नीसे ब्रह्मतेजसे सम्पन्न कई पुत्र उत्पन्न किये॥ २॥
रथीतरस्याप्रजस्य भार्यायां तन्तवेऽर्थितः।
अंगिरा जनयामास ब्रह्मवर्चस्विनः सुतान्॥ २
रथीतर सन्तानहीन था। वंश परम्पराकी रक्षाके लिये उसने अंगिरा ऋषिसे प्रार्थना की, उन्होंने उसकी पत्नीसे ब्रह्मतेजसे सम्पन्न कई पुत्र उत्पन्न किये॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 31) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/6/2/