श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.1

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अथ षष्ठोऽध्यायः

इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन, मान्धाता और सौभरि ऋषिकी कथा

श्रीशुक उवाच

विरूपः केतुमाञ्छम्भुरम्बरीषसुतास्त्रयः।

विरूपात् पृषदश्‍वोऽभूत् तत्पुत्रस्तु रथीतरः॥ १

virūpaḥ ketumāñchambhurambarīṣasutāstrayaḥ|

virūpāt pṛṣadaśvo'bhūt tatputrastu rathītaraḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अम्बरीषके तीन पुत्र थे—विरूप, केतुमान् और शम्भु। विरूपसे पृषदश्‍व और उसका पुत्र रथीतर हुआ॥ १॥

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