परीक्षित्! महाराज अम्बरीषका यह परम पवित्र आख्यान है। जो इसका संकीर्तन और स्मरण करता है, वह भगवान्का भक्त हो जाता है॥ २७॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां नवमस्कन्धेऽम्बरीषचरितं ५
नाम पञ्चमोऽध्यायः॥ ५॥
इत्येतत् पुण्यमाख्यानमम्बरीषस्य भूपतेः।
संकीर्तयन्ननुध्यायन् भक्तो भगवतो भवेत्॥ २७
परीक्षित्! महाराज अम्बरीषका यह परम पवित्र आख्यान है। जो इसका संकीर्तन और स्मरण करता है, वह भगवान्का भक्त हो जाता है॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.5.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 31) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/5/27/