श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.5

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ये भूता ये भविष्याश्‍च भवन्त्यद्यतनाश्‍च ये।

तेषां नः पुण्यकीर्तीनां सर्वेषां व२द विक्रमान्॥ ५

ye bhūtā ye bhaviṣyāśca bhavantyadyatanāśca ye|

teṣāṃ naḥ puṇyakīrtīnāṃ sarveṣāṃ vada vikramān|| 5

अर्थ

वैवस्वत मनुके वंशमें जो हो चुके हों, इस समय विद्यमान हों और आगे होनेवाले हों—उन सब पवित्रकीर्ति पुरुषोंके पराक्रमका वर्णन कीजिये॥ ५॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    त्वमनुक्रमात्।

    (मुद्रित पृष्ठ 7)

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