श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.4

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तेषां वंशं पृथग् ब्रह्मन् वंश्१यानुचरितानि च।

कीर्तयस्व महाभाग नित्यं शुश्रूषतां हि नः॥ ४

teṣāṃ vaṃśaṃ pṛthag brahman vaṃśyānucaritāni ca|

kīrtayasva mahābhāga nityaṃ śuśrūṣatāṃ hi naḥ|| 4

अर्थ

ब्रह्मन्! अब आप कृपा करके उनके वंश और वंशमें होनेवालोंका अलग-अलग चरित्र वर्णन कीजिये। महाभाग! हमारे हृदयमें सर्वदा ही कथा सुननेकी उत्सुकता बनी रहती है॥ ४॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    वंश्यादिचरि०।

    (मुद्रित पृष्ठ 7)

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