श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

स वै विवस्वतः पुत्रो मनुरासीदिति श्रुतम्।

त्वत्तस्तस्य सुताश्‍चोक्ता इक्ष्वाकुप्रमुखा नृपाः॥ ३

sa vai vivasvataḥ putro manurāsīditi śrutam|

tvattastasya sutāścoktā ikṣvākupramukhā nṛpāḥ|| 3

अर्थ

आपने कहा कि पिछले कल्पके अन्तमें द्रविड़ देशके स्वामी राजर्षि सत्यव्रतने भगवान्‌की सेवासे ज्ञान प्राप्त किया और वही इस कल्पमें वैवस्वत मनु हुए। आपने उनके इक्ष्वाकु आदि नरपति पुत्रोंका भी वर्णन किया॥ २-३॥

यह अर्थ श्लोक 2–3 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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