श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.26

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

हिरण्यकशिपुरुवाच

कल्पान्ते कालसृष्टेन योऽन्धेन तमसाऽऽवृतम्।

अभिव्यनग् जगदिदं स्वयंज्योतिः स्वरोचिषा॥ २६

kalpānte kālasṛṣṭena yo'ndhena tamasā''vṛtam|

abhivyanag jagadidaṃ svayaṃjyotiḥ svarociṣā|| 26

अर्थ

हिरण्यकशिपुने कहा—कल्पके अन्तमें यह सारी सृष्टि कालके द्वारा प्रेरित तमोगुणसे, घने अन्धकारसे ढक गयी थी। उस समय स्वयंप्रकाशस्वरूप आपने अपने तेजसे पुनः इसे प्रकट किया॥ २६॥

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