बेटा हिरण्यकशिपु! तुम्हारा यह काम बड़े-बड़े धीर पुरुष भी कठिनतासे कर सकते हैं। तुमने इस तपोनिष्ठासे मुझे अपने वशमें कर लिया है॥ २०॥
व्यवसायेन तेऽनेन दुष्करेण मनस्विनाम्।
तपोनिष्ठेन भवता जितोऽहं दितिनन्दन॥ २०
बेटा हिरण्यकशिपु! तुम्हारा यह काम बड़े-बड़े धीर पुरुष भी कठिनतासे कर सकते हैं। तुमने इस तपोनिष्ठासे मुझे अपने वशमें कर लिया है॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.3.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 820) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/3/20/