श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.19

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

नैतत्पूर्वर्षयश्‍चक्रुर्न करिष्यन्ति चापरे।

निरम्बुर्धारयेत्प्राणान् को वै दिव्यसमाः शतम्॥ १९

naitatpūrvarṣayaścakrurna kariṣyanti cāpare|

niramburdhārayetprāṇān ko vai divyasamāḥ śatam|| 19

अर्थ

ऐसी कठिन तपस्या न तो पहले किसी ऋषिने की थी और न आगे ही कोई करेगा। भला ऐसा कौन है जो देवताओंके सौ वर्षतक बिना पानीके जीता रहे॥ १९॥

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