देवियो! जो अविनाशी ईश्वर अपनी मौजसे इस जगत्को बनाता है, रखता है और बिगाड़ देता है—उस प्रभुका यह एक खिलौनामात्र है। वह इस चराचर जगत्को दण्ड या पुरस्कार देनेमें समर्थ है॥ ३९॥✎ 2019
य इच्छयेशः सृजतीदमव्ययो
य एव रक्षत्यवलुम्पते च यः।
तस्याबलाः क्रीडनमाहुरीशितु-
श्चराचरं निग्रहसङ्ग्रहे प्रभुः॥ ३९
देवियो! जो अविनाशी ईश्वर अपनी मौजसे इस जगत्को बनाता है, रखता है और बिगाड़ देता है—उस प्रभुका यह एक खिलौनामात्र है। वह इस चराचर जगत्को दण्ड या पुरस्कार देनेमें समर्थ है॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.2.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 815) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/2/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)