॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.2.38
अहो वयं धन्यतमा यदत्र
त्यक्ताः पितृभ्यां न विचिन्तयामः।
अभक्ष्यमाणा अबला वृकादिभिः
स रक्षिता रक्षति यो हि गर्भे॥ ३८✎ 1098
aho vayaṃ dhanyatamā yadatra
tyaktāḥ pitṛbhyāṃ na vicintayāmaḥ|
abhakṣyamāṇā abalā vṛkādibhiḥ
sa rakṣitā rakṣati yo hi garbhe|| 38
अर्थ
हम तो तुमसे लाखगुने अच्छे हैं, परम धन्य हैं; क्योंकि हमारे माँ-बापने हमें छोड़ दिया है। हमारे शरीरमें पर्याप्त बल भी नहीं है, फिर भी हमें कोई चिन्ता नहीं है। भेड़िये आदि हिंसक जन्तु हमारा बाल भी बाँका नहीं कर पाते। जिसने गर्भमें रक्षा की थी, वही इस जीवनमें भी हमारी रक्षा करता रहता है॥ ३८॥✎ 2019