युधिष्ठिर! मनुष्योंमें भी ब्राह्मण विशेष सुपात्र माना गया है। क्योंकि वह अपनी तपस्या, विद्या और सन्तोष आदि गुणोंसे भगवान्के वेदरूप शरीरको धारण करता है॥ ४१॥✎ 643644
पुरुषेष्वपि राजेन्द्र सुपात्रं ब्राह्मणं विदुः।
तपसा विद्यया तुष्ट्या धत्ते वेदं हरेस्तनुम्॥ ४१
युधिष्ठिर! मनुष्योंमें भी ब्राह्मण विशेष सुपात्र माना गया है। क्योंकि वह अपनी तपस्या, विद्या और सन्तोष आदि गुणोंसे भगवान्के वेदरूप शरीरको धारण करता है॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.14.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 893) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/14/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)