महाराज! हमारी और तुम्हारी तो बात ही क्या—ये जो सर्वात्मा भगवान् श्रीकृष्ण हैं, इनके भी इष्टदेव ब्राह्मण ही हैं। क्योंकि उनके चरणोंकी धूलसे तीनों लोक पवित्र होते रहते हैं॥ ४२॥✎ 643644
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां सप्तमस्कन्धे सदाचारनिर्णयो नाम चतुर्दशोऽध्यायः॥ १४॥
नन्वस्य ब्राह्मणा राजन्कृष्णस्य जगदात्मनः।
पुनन्तः पादरजसा त्रिलोकीं दैवतं महत्॥ ४२
महाराज! हमारी और तुम्हारी तो बात ही क्या—ये जो सर्वात्मा भगवान् श्रीकृष्ण हैं, इनके भी इष्टदेव ब्राह्मण ही हैं। क्योंकि उनके चरणोंकी धूलसे तीनों लोक पवित्र होते रहते हैं॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.14.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 893) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/14/42/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)