श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.70

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

एवं दग्ध्वा पुरस्तिस्रो भगवान्पुरहा नृप।

ब्रह्मादिभिः स्तूयमानः स्वधाम प्रत्यपद्यत॥ ७०

evaṃ dagdhvā purastisro bhagavānpurahā nṛpa|

brahmādibhiḥ stūyamānaḥ svadhāma pratyapadyata|| 70

अर्थ

युधिष्ठिर! इस प्रकार उन तीनों पुरोंको जलाकर भगवान् शंकरने ‘पुरारि’की पदवी प्राप्त की और ब्रह्मादिकोंकी स्तुति सुनते हुए अपने धामको चले गये॥ ७०॥

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