यों तो वे सबसे प्राचीन हैं, परन्तु जान पड़ते हैं ऐसे मानो पाँच-छः बरसके बच्चे हों। वस्त्र भी नहीं पहनते। उन्हें साधारण बालक समझकर द्वारपालोंने उनको भीतर जानेसे रोक दिया॥ ३६॥
पञ्चषड्ढायनार्भाभाः पूर्वेषामपि पूर्वजाः।
दिग्वाससःशिशून् मत्वा द्वाःस्थौ तान् प्रत्यषेधताम्॥ ३६
यों तो वे सबसे प्राचीन हैं, परन्तु जान पड़ते हैं ऐसे मानो पाँच-छः बरसके बच्चे हों। वस्त्र भी नहीं पहनते। उन्हें साधारण बालक समझकर द्वारपालोंने उनको भीतर जानेसे रोक दिया॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 809) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/1/36/