श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.36

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

पञ्चषड्ढायनार्भाभाः पूर्वेषामपि पूर्वजाः।

दिग्वाससःशिशून् मत्वा द्वाःस्थौ तान् प्रत्यषेधताम्॥ ३६

pañcaṣaḍḍhāyanārbhābhāḥ pūrveṣāmapi pūrvajāḥ|

digvāsasaḥśiśūn matvā dvāḥsthau tān pratyaṣedhatām|| 36

अर्थ

यों तो वे सबसे प्राचीन हैं, परन्तु जान पड़ते हैं ऐसे मानो पाँच-छः बरसके बच्चे हों। वस्त्र भी नहीं पहनते। उन्हें साधारण बालक समझकर द्वारपालोंने उनको भीतर जानेसे रोक दिया॥ ३६॥

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