श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.35

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

नारद उवाच

एकदा ब्रह्मणः पुत्रा विष्णोर्लोकं यदृच्छया।

सनन्दनादयो जग्मुश्‍चरन्तो भुवनत्रयम्॥ ३५

ekadā brahmaṇaḥ putrā viṣṇorlokaṃ yadṛcchayā|

sanandanādayo jagmuścaranto bhuvanatrayam|| 35

अर्थ

नारदजीने कहा—एक दिन ब्रह्माके मानसपुत्र सनकादि ऋषि तीनों लोकोंमें स्वच्छन्द विचरण करते हुए वैकुण्ठमें जा पहुँचे॥ ३५॥

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