श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.34

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

देहेन्द्रियासुहीनानां वैकुण्ठपुरवासिनाम्।

देहसम्बन्धसम्बद्धमेतदाख्यातुमर्हसि ॥ ३४

dehendriyāsuhīnānāṃ vaikuṇṭhapuravāsinām|

dehasambandhasambaddhametadākhyātumarhasi || 34

अर्थ

वैकुण्ठके रहनेवाले लोग प्राकृत शरीर, इन्द्रिय और प्राणोंसे रहित होते हैं। उनका प्राकृत शरीरसे सम्बन्ध किस प्रकार हुआ, यह बात आप अवश्य सुनाइये॥ ३४॥

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