श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.10.2

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तथाभियाचितो देवैर्ऋषिराथर्वणो महान्।✎ 1088 1089

मोदमान उवाचेदं प्रहसन्‍निव भारत॥ २

tathābhiyācito devair:ṛṣirātharvaṇo mahān|

modamāna uvācedaṃ prahasanniva bhārata|| 2

अर्थ

अब देवताओंने उदारशिरोमणि अथर्ववेदी दधीचि ऋषिके पास जाकर भगवान्‌के आज्ञानुसार याचना की। देवताओंकी याचना सुनकर दधीचि ऋषिको बड़ा आनन्द हुआ। उन्होंने हँसकर देवताओंसे कहा—॥ २॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1088 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): देवैऋर्षिराथर्वणो → देवैऋर्ऋषिराथर्वणो
  • #1089 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): देवैऋर्ऋषिराथर्वणो → देवैर्ऋषिराथर्वणो

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