श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.30.46

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

भस्मसात्क्रियमाणांस्तान्द्रुमान् वीक्ष्य पितामहः।

आगतः शमयामास पुत्रान् बर्हिष्मतो नयैः॥ ४६

bhasmasātkriyamāṇāṃstāndrumān vīkṣya pitāmahaḥ|

āgataḥ śamayāmāsa putrān barhiṣmato nayaiḥ|| 46

अर्थ

जब ब्रह्माजीने देखा कि वे सारे वृक्षोंको भस्म कर रहे हैं, तब वे वहाँ आये और प्राचीनबर्हिके पुत्रोंको उन्होंने युक्तिपूर्वक समझाकर शान्त किया॥ ४६॥✎ 424 425 1349

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #424 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #425 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने
  • #1349 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीहरि-की → श्रीहरिकी

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