श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.25.46

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

पंच द्वारस्तु पौरस्त्या दक्षिणैका तथोत्तरा।

पश्चिमे द्वे अमूषां ते नामानि नृप वर्णये॥ ४६

paṃca dvārastu paurastyā dakṣiṇaikā tathottarā|

paścime dve amūṣāṃ te nāmāni nṛpa varṇaye|| 46

अर्थ

राजन्! इनमेंसे पाँच पूर्व, एक दक्षिण, एक उत्तर और दो पश्चिमकी ओर थे। उनके नामोंका वर्णन करता हूँ॥ ४६॥✎ 1338 1339

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1338 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति → निऋर्ऋति
  • #1339 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति → निर्ऋति

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