स्त्रियाँ कोई अपराध करें, तो साधारण जीव भी उनपर हाथ नहीं उठाते; फिर आप जैसे करुणामय और दीनवत्सल तो ऐसा कर ही कैसे सकते हैं?॥ २०॥✎ 1329
प्रहरन्ति न वै स्त्रीषु कृतागःस्वपि जन्तवः।
किमुत त्वद्विधा राजन् करुणा दीनवत्सलाः॥ २०
स्त्रियाँ कोई अपराध करें, तो साधारण जीव भी उनपर हाथ नहीं उठाते; फिर आप जैसे करुणामय और दीनवत्सल तो ऐसा कर ही कैसे सकते हैं?॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.17.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 490) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/17/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1329 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): शरणा-गतवत्सल → शरणागतवत्सल