ātmānaṃ ca prajāścemāḥ kathamambhasi dhāsyasi|| 21
अर्थ
मैं तो एक सुदृढ़ नौकाके समान हूँ, सारा जगत् मेरे ही आधारपर स्थित हैं। मुझे तोड़कर आप अपनेको और अपनी प्रजाको जलके ऊपर कैसे रखेंगे?’॥ २१॥
मां विपाट्याजरां नावं यत्र विश्वं प्रतिष्ठितम्।
आत्मानं च प्रजाश्चेमाः कथमम्भसि धास्यसि॥ २१
मैं तो एक सुदृढ़ नौकाके समान हूँ, सारा जगत् मेरे ही आधारपर स्थित हैं। मुझे तोड़कर आप अपनेको और अपनी प्रजाको जलके ऊपर कैसे रखेंगे?’॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.17.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 490) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/17/21/