आयुष्मन्! यह श्रेष्ठ विमान पुण्यश्लोकशिखामणि श्रीहरिने आपके लिये ही भेजा है, आप इसपर चढ़नेयोग्य हैं॥ २७॥✎ 3821326
एतद्विमानप्रवरमुत्तमश्लोकमौलिना ।
उपस्थापितमायुष्मन्नधिरोढुं त्वमर्हसि॥ २७
आयुष्मन्! यह श्रेष्ठ विमान पुण्यश्लोकशिखामणि श्रीहरिने आपके लिये ही भेजा है, आप इसपर चढ़नेयोग्य हैं॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 470) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/12/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)