श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.12.27

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

एतद्विमानप्रवरमुत्तमश्लोकमौलिना ।

उपस्थापितमायुष्मन्‍नधिरोढुं त्वमर्हसि॥ २७

etadvimānapravaramuttamaślokamaulinā |

upasthāpitamāyuṣmannadhiroḍhuṃ tvamarhasi|| 27

अर्थ

आयुष्मन्! यह श्रेष्ठ विमान पुण्यश्लोकशिखामणि श्रीहरिने आपके लिये ही भेजा है, आप इसपर चढ़नेयोग्य हैं॥ २७॥✎ 382 1326

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #382 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #1326 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पुण्यश्लोक-शिखामणि → पुण्यश्लोकशिखामणि

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