प्रियवर! आजतक आपके पूर्वज तथा और कोई भी उस पदपर कभी नहीं पहुँच सके। भगवान् विष्णुका वह परमधाम सारे संसारका वन्दनीय है, आप वहाँ चलकर विराजमान हों॥ २६॥✎ 3821326
अनास्थितं ते पितृभिरन्यैरप्यंग कर्हिचित्।
आतिष्ठ जगतां वन्द्यं तद्विष्णोः परमं पदम्॥ २६
प्रियवर! आजतक आपके पूर्वज तथा और कोई भी उस पदपर कभी नहीं पहुँच सके। भगवान् विष्णुका वह परमधाम सारे संसारका वन्दनीय है, आप वहाँ चलकर विराजमान हों॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 470) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/12/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)