श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.24

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

पद्मगर्भारुणापांगं हृद्यहासावलोकनम्।

श्‍वासैजद्वलिसंवि‌ग्‍ननिम्‍ननाभिदलोदरम्॥ २४

padmagarbhāruṇāpāṃgaṃ hṛdyahāsāvalokanam|

śvāsaijadvalisaṃvignanimnanābhidalodaram|| 24

अर्थ

नेत्रोंके कोने कमलके भीतरी भागके समान तनिक लाल-लाल थे। मुसकान और चितवन बरबस हृदयको पकड़ लेती थी। बड़ी गम्भीर नाभि थी। छोटी-सी तोंद पीपलके पत्तेके समान जान पड़ती और श्‍वास लेनेके समय उसपर पड़ी हुई बलें तथा नाभि भी हिल जाया करती थी॥ २४॥

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