श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.23

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

श्‍वासैजदलकाभातं कम्बुश्रीकर्णदाडिमम्।

विद्रुमाधरभासेषच्छोणायितसुधास्मितम्॥ २३

śvāsaijadalakābhātaṃ kambuśrīkarṇadāḍimam|

vidrumādharabhāseṣacchoṇāyitasudhāsmitam|| 23

अर्थ

काली-काली घुँघराली अलकें कपोलोंपर लटक रही थीं और श्‍वास लगनेसे कभी-कभी हिल भी जाती थीं। शंखके समान घुमावदार कानोंमें अनारके लाल-लाल फूल शोभायमान हो रहे थे। मूँगेके समान लाल-लाल होठोंकी कान्तिसे उनकी सुधामयी श्‍वेत मुसकान कुछ लालिमामिश्रित हो गयी थी॥ २३॥

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