श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.22

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

महामरकतश्यामं श्रीमद्वदनपंकजम्।

कम्बुग्रीवं महोरस्कं सुनासं सुन्दरभ्रुवम्॥ २२

mahāmarakataśyāmaṃ śrīmadvadanapaṃkajam|

kambugrīvaṃ mahoraskaṃ sunāsaṃ sundarabhruvam|| 22

अर्थ

वह शिशु मरकतमणिके समान साँवल-साँवला था। मुखकमलपर सारा सौन्दर्य फूटा पड़ता था। गरदन शंखके समान उतार-चढ़ाववाली थी। छाती चौड़ी थी। तोतेकी चोंचके समान सुन्दर नासिका और भौंहें बड़ी मनोहर थीं॥ २२॥

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