श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.36

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

शौनक उवाच

पैलादिभिर्व्यासशिष्यैर्वेदाचार्यैर्महात्मभिः।

वेदाश्‍च कतिधा व्यस्ता एतत् सौम्याभिधेहि नः॥ ३६

pailādibhirvyāsaśiṣyairvedācāryairmahātmabhiḥ|

vedāśca katidhā vyastā etat saumyābhidhehi naḥ|| 36

अर्थ

शौनकजीने पूछा—साधुशिरोमणि सूतजी! वेदव्यासजीके शिष्य पैल आदि महर्षि बड़े महात्मा और वेदोंके आचार्य थे। उन लोगोंने कितने प्रकारसे वेदोंका विभाजन किया, यह बात आप कृपा करके हमें सुनाइये॥ ३६॥

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