भगवान् श्रीकृष्णका ज्ञान अनन्त है। उन्हींके चरणकमलोंके ध्यानसे मैंने इस श्रीमद्भागवत-महापुराणका अध्ययन किया है। मैं अब उन्हींको नमस्कार करके यह पुराण समाप्त करता हूँ॥ ३५॥
नमो भगवते तस्मै कृष्णायाकुण्ठमेधसे।
यत्पादाम्बुरुहध्यानात् संहितामध्यगामिमाम्॥ ३५
भगवान् श्रीकृष्णका ज्ञान अनन्त है। उन्हींके चरणकमलोंके ध्यानसे मैंने इस श्रीमद्भागवत-महापुराणका अध्ययन किया है। मैं अब उन्हींको नमस्कार करके यह पुराण समाप्त करता हूँ॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 937) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/6/35/