जब ब्राह्मणोंने इस प्रकार आकर्षणमन्त्रका पाठ किया, तब तो इन्द्र अपने स्थान—स्वर्गलोकसे विचलित हो गये। विमानपर बैठे हुए इन्द्र तक्षकके साथ ही बहुत घबड़ा गये और उनका विमान भी चक्कर काटने लगा॥ २२॥
इति ब्रह्मोदिताक्षेपैः स्थानादिन्द्रः प्रचालितः।
बभूव सम्भ्रान्तमतिः सविमानः सतक्षकः॥ २२
जब ब्राह्मणोंने इस प्रकार आकर्षणमन्त्रका पाठ किया, तब तो इन्द्र अपने स्थान—स्वर्गलोकसे विचलित हो गये। विमानपर बैठे हुए इन्द्र तक्षकके साथ ही बहुत घबड़ा गये और उनका विमान भी चक्कर काटने लगा॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 935) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/6/22/