इस प्रकार सब पुराणोंकी श्लोकसंख्या कुल मिलाकर चार लाख होती है। उनमें श्रीमद्भागवत, जैसा कि पहले कहा जा चुका है, अठारह हजार श्लोकोंका है॥ ९॥
एवं पुराणसन्दोहश्चतुर्लक्ष उदाहृतः।
तत्राष्टादशसाहस्रं श्रीभागवतमिष्यते॥ ९
इस प्रकार सब पुराणोंकी श्लोकसंख्या कुल मिलाकर चार लाख होती है। उनमें श्रीमद्भागवत, जैसा कि पहले कहा जा चुका है, अठारह हजार श्लोकोंका है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.13.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 980) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/13/9/