श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.13.8

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

कौर्मं सप्तदशाख्यातं मात्स्यं तत्तु चतुर्दश।

एकोनविंशत्सौपर्णं ब्रह्माण्डं द्वादशैव तु॥ ८

kaurmaṃ saptadaśākhyātaṃ mātsyaṃ tattu caturdaśa|

ekonaviṃśatsauparṇaṃ brahmāṇḍaṃ dvādaśaiva tu|| 8

अर्थ

कूर्मपुराण सत्रह हजार श्‍लोकोंका और मत्स्यपुराण चौदह हजार श्‍लोकोंका है। गरुड़पुराणमें उन्‍नीस हजार श्‍लोक हैं और ब्रह्माण्डपुराणमें बारह हजार॥ ८॥

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