॥ श्रीहरिः ॥
ब्राह्मं दशसहस्राणि पाद्मं पंचोनषष्टि च।
श्रीवैष्णवं त्रयोविंशच्चतुर्विंशति शैवकम्॥ ४
brāhmaṃ daśasahasrāṇi pādmaṃ paṃconaṣaṣṭi ca|
śrīvaiṣṇavaṃ trayoviṃśaccaturviṃśati śaivakam|| 4
अर्थ
ब्रह्मपुराणमें दस हजार श्लोक, पद्मपुराणमें पचपन हजार, श्रीविष्णुपुराणमें तेईस हजार और शिवपुराणकी श्लोकसंख्या चौबीस हजार है॥ ४॥
ब्राह्मं दशसहस्राणि पाद्मं पंचोनषष्टि च।
श्रीवैष्णवं त्रयोविंशच्चतुर्विंशति शैवकम्॥ ४
ब्रह्मपुराणमें दस हजार श्लोक, पद्मपुराणमें पचपन हजार, श्रीविष्णुपुराणमें तेईस हजार और शिवपुराणकी श्लोकसंख्या चौबीस हजार है॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.13.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 980) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/13/4/